उद्योग

गृह सचिव के पूर्ण पर्यवेक्षण में उद्योग विभाग संघशासित प्रदेश चण्डीगढ़ में संपूर्ण औद्योगिक एवं व्यापारिक विकास कार्य देखता है; यह उद्योगों को बढ़ावा देने वाले क्रियाकलापों के नियमन एवं समन्वयन में सीधी सहायता उपलब्ध कराता है। उद्योग महानिदेशालय इस विभाग के अंतर्गत कार्य करने वाली एक प्रमुख एजेंसी है, किंतु साथ ही कई विशेषज्ञ एजेंसियां कार्यरत हैं, जिसमें – औद्योगिक विकास (नियमन) अधिनियम, 1956 (लघु स्तर के उद्योगों के पंजीकरण के लिए, इस संबंध में विभाग केंद्रीय विकास आयुक्त, लघु सरिया उद्योग के अनुदेशकों का अनुपालन करता है) ; इलेक्ट्रिकल वायर्स, केबल्सक, एप्लायंसेज एंड असेस्रीेज़ (क्वालिटी कंट्रोल) ऑर्डर 1993; द सीमेंट (क्वालिटी कंट्रोल) ऑर्डर 1995 तथा ऑयल एंड ग्रीसिज़ (प्रोसेसिंग सप्लाई एंड डिस्ट्रीब्यूशन रेगुलेशन) ऑर्डर 1987 शामिल हैं।

चण्डीगढ़ में वर्तमान समय में लगभग 2950 लघु स्तर के और 15 बड़े एवं मध्यम स्तसर के यूनिट है। गत कुछ वर्षों से चण्डीगढ़ में उद्योगों का अत्यं9त सीमित विकास हुआ है। शहर की वास्तविक योजना तैयार करने के समय औद्योगिक विकास के लिए इसे सीमित स्थान प्रदान किए जाने के कारण यह एक औद्योगिक शहर नहीं है। तथापि, यह ध्यान में रखते हुए कि उद्योग शहर में महत्वपूर्ण संसाधन आधार प्रधान करेंगे, औद्योगिक क्षेत्र प्रमुखत: लघु स्तीरीय एवं प्रदूषण मुक्त उद्योगों के विकास के लिए लगभग 1450 एकड़ के सीमित क्षेत्र की योजना रखी गई है।

चण्डीगढ़ के लगभग 2950 लघु स्तरीय उद्योगों में से लगभग 40% चंडीगढ के आसपास स्थित प्रमुख ट्रैक्टर उद्योगों के लिए सहायक उपस्करों का निर्माण करने वाली यूनिटें हैं। इनमें छोटे अभियांत्रिकी उपस्कर बनाने वाली यूनिटें बड़ी संख्या में हैं, अन्य औद्योगिक यूनिटें मुख्यखत: औद्योगिक फास्टनर, इलेक्ट्रिकल/इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं, मशीन टूल्स, फार्मास्युटिकल्स, प्लास्टिक की वस्तुएं, सेनेटरी फिटिंग, स्टील व लकड़ी का फर्नीचर तथा खाद्य उत्पाद आदि बनाती हैं। यहां निर्मित कई वस्तुओं की विदेशों के बाजार में काफी मांग है। उद्योगों की वार्षिक आउटपुट लगभग 650 करोड रुपए है।

उद्योगों के रास्ते में भूमि की उपलब्धता के बाधक होने के कारण औद्योगिक क्षेत्र, फेज़-1 एवं फेज़-2 को छोड़कर अन्यत्र कहीं उद्योगों का विस्तार किया जाना यहां संभव नहीं है।

चण्डीगढ़ प्रशासन सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, क्योंकि इसके लिए कम स्थान की जरूरत होती है और इससे प्रदूषण भी नहीं होता। तदनुसार, सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (इलेक्ट्रॉनिक विभाग, भारत सरकार के अंतर्गत एक स्वायत्तशासी सोसायटी), जिसने पंजाब सरकार द्वारा स्थापित किए जा रहे प्रस्तावित सॉफ्टवेयर प्रौद्योगिकी पार्क/कॉम्लेथा क्सर के लिए मोहाली में एक अर्थ स्टेशन तैयार किया है, के माध्यम से पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज, चण्डीगढ़ में नोड उपलब्ध करवा कर सॉफ्टवेयर विकास एवं इसके निर्यात हेतु उच्च गति की डाटा संप्रेक्षण की व्यवस्था की गई है। पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर में इच्छुक उद्यमों को निर्धारित दरों पर लगभग 10000 वर्ग फुट स्थान किराए पर दिए जाने के लिए निर्धारित किया गया है।

प्रधानमंत्री रोजगार योजना के अंतर्गत विभाग संबंधित मामलों को टास्क फोर्स समिति के अनुमोदन के पश्चात राष्ट्रीयकृत बैंकों को भेज रहा है। लाभग्राहियों को उद्योगों के लिए रुपए 2।00 लाख और सेवा एवं व्यापार उपक्रमों के लिए रुपए 1।00 लाख का ऋण प्रदान किया जा रहा है। 15% सब्सिडी का भुगतान किया जाता है, जिसकी सीमा अधिकतम रुपए 7500 है।

चण्डीगढ़ औद्योगिक नीति 2015