ऐतिहासिक पृष्‍ठभूमि

‘द् सिटी ब्‍यूटीफुल’ के नाम से प्रसिद्ध चण्‍डीगढ़ शहर का ऐतिहासिक अतीत रहा है। जिस समतल क्षेत्र में आज का आधुनिक शहर बसा है वह पुराने समय में दलदल युक्‍त एक बड़ी झील हुआ करती थी। इस स्‍थान पर प्राप्‍त हुए जीवाश्‍म यहां अनुकूल वातावरण के कारण बड़े स्‍तर पर जलचर एवं जलथलचर जीवों के होने का प्रमाण प्रस्‍तुत करते हैं। यह क्षेत्र लगभग 8000 वर्ष पूर्व की हड़प्‍पा सभ्‍यता के लिए भी जाना जाता है। मध्‍यकाल से लेकर आधुनिक काल तक यह क्षेत्र बृहत् एवं समृद्ध पंजाब प्रांत का हिस्‍सा रहा, जिसे वर्ष 1947 में देश के बंटवारे के समय पूर्व एवं पश्चिम पंजाब में विभाजित किया गया था। यह शहर न केवल पूर्व पंजाब की राजधानी के रूप में बल्कि पश्चिम पंजाब से निकाले गए हज़ारों शरणार्थियों को बसाने के लिए बनाया गया।
मार्च 1948 में पंजाब सरकार ने भारत सरकार के परामर्श से शिवालिक की पहाडि़यों की तलहटी के क्षेत्र को नई राजधानी के रूप में अनुमोदित किया। जिस स्‍थान पर यह शहर बसा है वह स्‍थान अंबाला शहर के वर्ष 1892-93 के राजपत्र के अनुसार तत्‍कालीन अंबाला जिला का भाग था। शहर की नींव वर्ष 1952 में रखी गई। तदंतर, दिनांक 1 नवंबर, 1966 को पंजाब, हरियाणा एवं हिमाचल प्रदेश में राज्‍य के पुनर्गठित होने पर शहर को पंजाब व हरियाणा दोनों ही राज्‍यों की राजधानी होने का गौरव प्राप्‍त हुआ, जबकि शहर को केन्‍द्र सरकार के अधीन एक संघशासित प्रदेश घोषित किया गया।